Breaking

Post Top Ad

Your Ad Spot

Wednesday, 21 October 2020

नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ आईएनएस कवरत्ती, एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल ‘नाग’ का परीक्षण सफल

भारत में बना आईएनएस कवरत्ती गुरुवार को नौसेना के बेड़े में शामिल हो गया है। सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने विशाखापटनम नेवल डॉकयार्ड में इसे प्रोजेक्ट 28 (कमरोटा क्लास) के तहत कमीशंड किया । भारत में तैयार आईएनएस कवरत्ती एंटी-सबमरीन वारफेयर (एएसडब्ल्यू) और दुश्मन के रडार की पकड़ में नहीं आने वाली स्टील्थ तकनीक से लैस है। यह लंबी दूरी वाले ऑपरेशन्स में मददगार होगा।

भारत ने गुरुवार को सुरक्षा के क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल की। एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल ‘नाग’ का अंतिम परीक्षण गुरुवार सुबह राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में हुआ। वारहेड के साथ हुआ फाइनल ट्रायल सफल रहा। अब यह स्वदेशी मिसाइल सेना में शामिल होने के लिए तैयार है।

दिन और रात कभी भी दागी जा सकती है नाग मिसाइल

नाग मिसाइल को नाग मिसाइल कैरियर (एनएएमआईसीए) से लॉन्च किया गया। यह 4 से 7 किलोमीटर की रेंज तक निशाना लगा सकती है। यह एक थर्ड जेनरेशन एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है। दिन और रात दोनों समय दुश्मन टैंकों को निशाना बना सकती है। इसके सेना के शामिल होने के बाद इंडियन आर्मी आसानी से दुश्मन के टैंकों को निशाना बना सकेगी। रक्षा मंत्रालय ने 2018 में इंडियन आर्मी के लिए 300 नाग मिसाइल और 25 एनएएमआईसीए खरीदने को मंजूरी दी थी।

कमीशन होने ही सेवा शुरू करेगा आईएनएस कवरत्ती
आईएनएस कवरत्ती की डिजाइन इंडियन नेवी के नेवल डिजाइन डायरेक्टोरेट ने तैयार की है। इसे कोलकाता की गार्डन रीच शिप बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने तैयार किया है। जहाज बनाने के लिए 90% तक भारतीय सामान इस्तेमाल में लाए गए हैं। इस पोत का ढांचा तैयार करने में कार्बन कंपोजिट का इस्तेमाल हुआ है। नौसेना में शामिल होते ही अपनी सेवाएं शुरू कर देगा, क्योंकि इसके सभी समुद्री ट्रायल पहले ही पूरे हो चुके हैं।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
आईएनएस भारत के चार स्वदेशी पोत में से एक है। इसे बनाने के लिए 90% तक भारतीय सामान इस्तेमाल में लाए गए हैं। -फाइल फोटो


from Dainik Bhaskar

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad

Your Ad Spot